प्रेरणादायक कहानी
“एक टोकरी से शुरू हुई यात्रा… आज सैकड़ों घरों की रोशनी बन गई है।”
इस खूबसूरत यात्रा की शुरुआत 2016 में होती है—
मनपति पैकरा से, जिनके मन में कुछ नया सीखने की चाह थी।
ननिहाल पगुराबहार में उन्होंने झारखंड की कांसा टोकरी देखी।
टोकरी की सुंदरता ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि
उन्होंने तय कर लिया—
“मुझे यह कला सीखनी है।”
वे गोहमाला (झारखंड) गईं और
25 दिनों की मेहनत के बाद कांसा–छीन्द टोकरी बनाना सीखकर लौटीं।
कोटानपानी में उन्होंने चुपचाप यह काम शुरू किया,
लेकिन पहचान अभी दूर थी।
फिर 2017 में बड़ा मोड़ आया…
जिला पंचायत अध्यक्ष के आगमन पर
मनपति ने अपने हाथों से बनी टोकरी उन्हें उपहार में दी।
टोकरी देखकर वे बहुत प्रभावित हुए
और जशपुर हस्तशिल्प बोर्ड की तरफ से प्रशिक्षण शुरू करवाया।
यहीं से यह कला गाँव की महिलाओं का सहारा बन गई।
आज यही कला—
9 समूहों
700 से अधिक महिलाओं
और हर परिवार को ₹70,000–1,00,000 वार्षिक आय— प्रदान कर रही है।
2025 में बांस व कांसा-छीन्द से आभूषण निर्माण प्रशिक्षण ने महिलाओं के लिए एक नए आयाम की शुरुआत की।
Bamboo Lady of India – नीरा शर्मा और जशपुर वनमंडल के मार्गदर्शन में आज महिलाएँ सुंदर, सस्टेनेबल और बाज़ार में मांग वाले गहने तैयार कर रही हैं।
जशक्राफ्ट के बारे में लोग क्या कहते हैं
यह उत्पाद देखने में बेहद आकर्षक है और रोज़मर्रा के उपयोग में भी पूरी तरह मजबूत साबित हुआ। सबसे अच्छी बात यह है कि यह प्राकृतिक सामग्री से बना, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है।